विषय: लोकपाल संस्थान (Lokpal) + राजस्थान लोकायुक्त (Lokayukta) [कुल ६० प्रश्न]
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ओम्बुड्समैन (भ्रष्टाचार विरोधी) संस्थानों का सम्पूर्ण वस्तुनिष्ठ ग्रन्थ
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अनुभाग १: लोकपाल संस्थान (Lokpal) — ३० प्रश्न
Q1. भारत में लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के पारित होने के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC) की किस विधिक सिफारिश को मूल आधार माना जाता है?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: भारत में लोकपाल संस्था की नींव विधिक रूप से **वर्ष 1966 में गठित प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC)** द्वारा रखी गई थी, जिसके शुरुआती अध्यक्ष मोरारजी देसाई थे। इस आयोग ने नागरिक शिकायतों के निवारण हेतु स्वीडन के 'ओम्बुड्समैन' की तर्ज पर देश में लोकपाल (केंद्र हेतु) और लोकायुक्त (राज्यों हेतु) की स्थापना की मजबूत सिफारिश की थी। 'लोकपाल' शब्द का नामकरण विख्यात कानूनविद डॉ. एल.एम. सिंघवी ने किया था। अतः विकल्प (B) पूर्णतः सत्य है।
Q2. लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के विधिक प्रावधानों के अनुसार, लोकपाल संस्था की कुल सदस्य संरचना (अध्यक्ष सहित) अधिकतम कितनी निर्धारित की गई है?
सही उत्तर: (C)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: लोकपाल अधिनियम २०१३ के अनुसार, लोकपाल एक बहु-सदस्यीय निकाय है जिसमें **1 अध्यक्ष और अधिकतम 8 सदस्य** (कुल 9 सदस्य) हो सकते हैं। इस कानून में यह भी कड़ा विधिक नियम है कि इन ८ सदस्यों में से **$50\%$ सदस्य अनिवार्य रूप से न्यायिक पृष्ठभूमि (Judicial Members)** के होने चाहिए तथा शेष $50\%$ सदस्य SC, ST, OBC, अल्पसंख्यक वर्ग या महिला श्रेणी से होने आवश्यक हैं।
Q3. लोकपाल के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति करने हेतु गठित होने वाली 'उच्च स्तरीय चयन समिति' (Selection Committee) में निम्नलिखित में से कौन शामिल नहीं होता है?
सही उत्तर: (D)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: लोकपाल अधिनियम के विधिक उपबंधों के अनुसार, लोकपाल की चयन समिति में ५ विशिष्ट व्यक्ति शामिल होते हैं: १. प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), २. लोकसभा अध्यक्ष, ३. लोकसभा में विपक्ष का नेता, ४. भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा नामित कोई जज, और ५. राष्ट्रपति द्वारा नामित एक प्रख्यात कानूनविद (Eminent Jurist)। इस चयन समिति में यूपीएससी के अध्यक्ष या नीति आयोग के सीईओ को शामिल करने का कोई विधिक नियम नहीं है। अतः विकल्प (D) चयन समिति के दायरे से बाहर है।
Q4. लोकपाल संस्थान के अध्यक्ष एवं सदस्यों का विधिक 'कार्यकाल' एवं सेवानिवृत्ति की ऊपरी आयु सीमा अधिनियम के तहत कितनी निर्धारित की गई है?
सही उत्तर: (A)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: लोकपाल अधिनियम २०१३ की वैधानिक व्यवस्था के अनुसार, लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल **5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु** तक (जो भी पहले हो) निश्चित किया गया है। आरपीएससी परीक्षा की दृष्टि से यह तथ्य अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव आयोग और यूपीएससी में सेवानिवृत्ति आयु ६५ वर्ष है, परंतु मानवाधिकार आयोग और लोकपाल में यह ऊपरी आयु सीमा **७0 वर्ष** विधिक रूप से लागू होती है।
Q5. लोकपाल संस्थान के विधिक अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वथा सत्य है?
सही उत्तर: (C)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: लोकपाल अधिनियम की धारा १४ के अनुसार, **भारत के प्रधानमंत्री (PM)** को लोकपाल के विधिक क्षेत्राधिकार के दायरे में **शामिल किया गया है**। परंतु इसके लिए विशेष विधिक सुरक्षा दी गई है कि यदि आरोप अंतर्राष्ट्रीय संबंधों, बाहरी व आंतरिक सुरक्षा, लोक व्यवस्था, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विज्ञान से संबंधित है, तो लोकपाल उस शिकायत की जांच नहीं कर सकता। इसके अलावा सभी केंद्रीय मंत्री, सांसद और ग्रुप A, B, C, D के सभी लोक सेवक इसके पूर्ण क्षेत्राधिकार में आते हैं।
Q6. लोकपाल संस्थान के प्रशासनिक इतिहास के संदर्भ में, २३ मार्च २०१९ को देश के 'प्रथम आधिकारिक लोकपाल अध्यक्ष' के रूप में किसने विधिक शपथ ग्रहण की थी?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: लोकपाल अधिनियम २०१३ के पारित होने के लंबे समय बाद, देश के **प्रथम लोकपाल अध्यक्ष** के रूप में उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश **जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष (Just. P.C. Ghose)** को २३ मार्च २०१९ को राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया गया था। वर्तमान में (२०२४ से) देश के लोकपाल अध्यक्ष **जस्टिस ए.एम. खानविलकर** हैं।
Q7. लोकपाल अधिनियम, 2013 के विधिक प्रावधानों के अनुसार, भ्रष्टाचार की किसी शिकायत पर प्रारंभिक जांच (Preliminary Inquiry) पूरी करने के लिए लोकपाल द्वारा जांच विंग को अधिकतम कितनी समय सीमा विधिक रूप से दी जा सकती है?
सही उत्तर: (C)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: लोकपाल अधिनियम के अनुसार, जब लोकपाल किसी लोक सेवक के विरुद्ध शिकायत प्राप्त करता है, तो वह उसकी **प्रारंभिक जांच (Preliminary Inquiry)** के लिए अपनी विंग या किसी केंद्रीय जांच एजेंसी (जैसे CBI) को निर्देश दे सकता है। यह प्रारंभिक जांच **९0 दिनों** के भीतर पूरी करनी अनिवार्य होती है, परंतु विशेष परिस्थितियों में विधिक कारणों को दर्ज करके लोकपाल इस अवधि को और ९0 दिनों के लिए बढ़ा सकता है।
Q8. यदि लोकपाल किसी भ्रष्टाचार के मामले की जांच 'केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो' (CBI) को सौंपता है, तो उस विशेष जांच के संदर्भ में CBI अधिकारी पर प्रशासनिक और विधिक अधीक्षण (Superintendence) की शक्ति किसमें निहित होगी?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: लोकपाल अधिनियम २०१३ की धारा २५ के तहत एक अत्यंत शक्तिशाली विधिक व्यवस्था की गई है। इसके अनुसार, जब लोकपाल किसी मामले की जांच सीबीआई को संदर्भित करता है, तो उस विशिष्ट मामले की जांच के दौरान सीबीआई के अधिकारियों पर **संपूर्ण विधिक अधीक्षण, नियंत्रण और निर्देशन की शक्ति लोकपाल संस्थान में निहित होगी**। यहाँ तक कि लोकपाल की मर्जी और कोर्ट की अनुमति के बिना सरकार जांच करने वाले सीबीआई अधिकारी का स्थानांतरण (Transfer) भी नहीं कर सकती।
Q9. लोकपाल संस्थान के अध्यक्ष एवं सदस्यों के वेतन, भत्ते और सेवा शर्तें विधिक रूप से किसके समतुल्य (Equivalent) निर्धारित की गई हैं?
सही उत्तर: (A)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: लोकपाल अधिनियम २०१३ के विधिक नियमों के अनुसार, लोकपाल के **अध्यक्ष** को मिलने वाले वेतन, भत्ते और सेवा शर्तें **भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI)** के समरूप होते हैं (अर्थात ₹२,५0,000/माह प्लस भत्ते) तथा लोकपाल के **अन्य सदस्यों** को देय वेतन व भत्ते **उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीश** के समान विधिक रूप से निर्धारित किए गए हैं। इनके संपूर्ण खर्च भारत की संचित निधि पर भारित होते हैं।
Q10. लोकपाल अधिनियम के तहत, किसी भी लोक सेवक के विरुद्ध कितने वर्ष से अधिक पुराने भ्रष्टाचार के मामलों की शिकायत पर लोकपाल द्वारा कोई विधिक जांच प्रारंभ नहीं की जा सकती (Limitation Period)?
सही उत्तर: (D)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: लोकपाल अधिनियम २०१३ की **धारा ५३** स्पष्ट विधिक सीमा (Limitation Period) तय करती है। इसके अनुसार, लोकपाल ऐसे किसी भी भ्रष्टाचार या कदाचार के कृत्य की शिकायत को स्वीकार नहीं करेगा या उसकी जांच का आदेश नहीं देगा, जो कृत्य शिकायत दर्ज किए जाने की तारीख से **7 वर्ष से अधिक पुराना** हो। अर्थात ७ वर्ष की अवधि बीत जाने के बाद वह मामला विधिक रूप से 'काल-बाधित' (Time-barred) माना जाता है।
Q11. लोकपाल संस्थान के पास भ्रष्टाचार से अर्जित की गई किसी भी अवैध संपत्ति को कुर्क करने या ज़ब्त (Confiscation of Assets) करने के संदर्भ में कौन-सा विधिक अधिकार प्राप्त है?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: लोकपाल अधिनियम २०१३ की **धारा २६ और २७** लोकपाल को यह विशेष दंडात्मक और विधिक शक्ति देती है कि यदि जांच के दौरान प्रथम दृष्टया यह साबित हो जाता है कि संबंधित लोक सेवक ने भ्रष्टाचार के माध्यम से बेनामी या अवैध संपत्ति अर्जित की है, तो लोकपाल न्यायालय के अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा किए बिना ही, जांच के दौरान उस संपत्ति को **अस्थाई रूप से कुर्क (Attach) करने का सीधा विधिक आदेश** जारी कर सकता है।
Q12. लोकपाल को पद से हटाने की विधिक प्रक्रिया के संदर्भ में, भारतीय संविधान या अधिनियम के तहत कौन-सा नियम सर्वथा सत्य माना जाता है?
सही उत्तर: (C)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: लोकपाल अधिनियम २०१३ की धारा ३७ के अनुसार, लोकपाल के अध्यक्ष या किसी सदस्य को केवल 'दुर्व्यवहार' या 'अक्षमता' के आधार पर ही हटाया जा सकता है। इसके लिए विधिक नियम यह है कि **संसद के कम से कम १०० सांसदों** द्वारा हस्ताक्षरित एक याचिका राष्ट्रपति को दी जाएगी। राष्ट्रपति उस याचिका के आधार पर मामले को **उच्चतम न्यायालय (Supreme Court)** को जांच हेतु भेजेंगे। सुप्रीम कोर्ट की विधिक जांच में दोष सिद्ध होने पर ही राष्ट्रपति उन्हें पद से हटा सकते हैं।
Q13. विश्व के इतिहास में सर्वप्रथम किस देश ने वर्ष १८0९ में प्रशासनिक भ्रष्टाचार और नागरिकों की शिकायतों के निवारण हेतु 'ओम्बुड्समैन' (Ombudsman) नामक स्वतंत्र विधिक संस्था की स्थापना की थी?
सही उत्तर: (A)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: ओम्बुड्समैन (Ombudsman) की अवधारणा का ऐतिहासिक उद्गम **वर्ष 1809 में स्वीडन** में हुआ था। स्वीडिश भाषा में ओम्बुड्समैन का अर्थ होता है 'नागरिकों का विधिक प्रतिनिधि' या 'लोकपाल'। इसके बाद फिनलैंड, नॉर्वे और न्यूजीलैंड जैसे देशों ने इसे अपनाया। भारत में इसी वैश्विक मॉडल को परिष्कृत करके लोकपाल एवं लोकायुक्त के नाम से विधिक जामा पहनाया गया है।
Q14. लोकपाल अधिनियम, 2013 के विधिक दायरे के अनुसार, विदेशों से प्राप्त होने वाले चंदे (Foreign Contributions) के संदर्भ में कौन-सा गैर-सरकारी संगठन (NGO) लोकपाल के विधिक क्षेत्राधिकार के दायरे में आता है?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: लोकपाल अधिनियम २०१३ की धारा १४ के विधिक उपबंधों के अनुसार, भ्रष्टाचार केवल सरकारी विभागों तक ही सीमित नहीं है। कोई भी एसोसिएशन, ट्रस्ट या गैर-सरकारी संगठन (NGO) जो विदेशी अंशदान विधिक नियमन कानून (FCRA) के तहत विदेशों से प्रतिवर्ष **₹१०,00,000 (दस लाख रुपये)** से अधिक की वित्तीय सहायता या फॉरेन फंडिंग प्राप्त करता है, उसके निदेशक और अधिकारी विधिक रूप से लोकपाल के क्षेत्राधिकार के दायरे में आते हैं।
Q15. लोकपाल संस्थान के भीतर आने वाली 'विधिक विंग' (Judicial Wing / Prosecution Wing) का मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कौन होता है, जो लोक सेवकों के विरुद्ध विशेष अदालतों में मुक़दमे चलाता है?
सही उत्तर: (C)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: लोकपाल संस्थान के सुचारू और स्वतंत्र मुक़दमेबाज़ी के संचालन हेतु अधिनियम की धारा २४ के तहत एक **'अभियोजन विंग' (Prosecution Wing)** का प्रावधान है। इस विंग का सर्वोच्च प्रशासनिक अध्यक्ष **'निदेशक अभियोजन' (Director of Prosecution)** होता है। यह अधिकारी भारत सरकार के सचिव स्तर का समकक्ष कानूनविद होता है, जिसे लोकपाल की चयन समिति की सिफारिश पर नियुक्त किया जाता है और यह लोकपाल के निर्देशों के अधीन विशेष न्यायालयों में केस चलाता है।
अनुभाग २: राजस्थान लोकायुक्त — ३० प्रश्न
Q16. राजस्थान लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 के विधिक प्रावधानों के अनुसार, राजस्थान के लोकायुक्त के 'अधिकार क्षेत्र' (Jurisdiction) के दायरे में निम्नलिखित में से कौन शामिल माना जाता है?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: आरपीएससी मुख्य परीक्षा और प्रीलिम्स में लोकायुक्त के अधिकार क्षेत्र पर बहुत बारीक सवाल पूछे जाते हैं। **राजस्थान लोकायुक्त अधिनियम 1973** के विधिक उपबंधों के अनुसार, राज्य सरकार के समस्त कैबिनेट व राज्य मंत्री, विधानसभा के सदस्य (MLA), जिला प्रमुख, प्रधान, नगर पालिकाओं के अध्यक्ष और राज्य के समस्त लोक सेवक (IAS/RAS अधिकारी) लोकायुक्त के क्षेत्राधिकार के **दायरे में शामिल हैं**। अतः विकल्प (B) पूर्णतः सत्य है।
Q17. राजस्थान लोकायुक्त अधिनियम, 1973 के तहत निम्नलिखित में से कौन-सा शीर्ष विधिक या प्रशासनिक पद लोकायुक्त के जाँच के अधिकार क्षेत्र से 'पूर्णतः बाहर' (Excluded) रखा गया है?
सही उत्तर: (D)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: राष्ट्रीय स्तर के लोकपाल के विपरीत, राजस्थान लोकायुक्त कानून के तहत **राज्य के मुख्यमंत्री (CM)** को लोकायुक्त के विधिक दायरे से **पूर्णतः बाहर (Excluded)** रखा गया है। उनके अलावा राज्य के राज्यपाल, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, न्यायिक सेवा के अधिकारी, आरपीएससी के अध्यक्ष व सदस्य, राज्य निर्वाचन आयुक्त और विधान सभा सचिवालय के कर्मचारी भी लोकायुक्त के जाँच दायरे से विधिक रूप से पूर्णतः बाहर हैं।
Q18. राजस्थान में लोकायुक्त की 'नियुक्ति' (Appointment) करने से पूर्व, राज्य के राज्यपाल के लिए अधिनियम की धारा ३ के तहत किससे विधिक परामर्श (Consultation) करना अनिवार्य होता है?
सही उत्तर: (A)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: अधिनियम की धारा ३ के विधिक नियमों के अनुसार, लोकायुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा एक उच्च स्तरीय अनिवार्य परामर्श के बाद की जाती है। राज्यपाल महोदय इसके लिए: १. **राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of Rajasthan High Court)**, तथा २. **विधानसभा में विपक्ष के नेता (Leader of Opposition)** से विधिक विचार-विमर्श करते हैं। व्यावहारिक रूप से मुख्यमंत्री की सलाह इसमें अंतर्निहित होती है।
Q19. राजस्थान के लोकायुक्त के पद की गरिमा के संदर्भ में, लोकायुक्त का 'वेतन, भत्ते और सेवा शर्तें' विधिक रूप से राज्य के भीतर किस पद के समरूप निर्धारित की गई हैं?
सही उत्तर: (C)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: राजस्थान लोकायुक्त अधिनियम १९७३ के वैधानिक नियमों के तहत, लोकायुक्त का पद और उनकी वित्तीय सेवा शर्तें अत्यंत उच्च रखी गई हैं। लोकायुक्त को देय मासिक वेतन और भत्ते **राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice)** के पूर्णतः समान होते हैं। इसी प्रकार, यदि उप-लोकायुक्त नियुक्त किया जाता है, तो उनका वेतन उच्च न्यायालय के सामान्य न्यायाधीश के समान विधिक रूप से निर्धारित होता है।
Q20. राजस्थान लोकायुक्त संस्थान के विधिक इतिहास के संदर्भ में, २८ अगस्त १९७३ को राज्य के 'प्रथम लोकायुक्त' के रूप में किसने पदभार विधिक रूप से ग्रहण किया था?
सही उत्तर: (A)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: जब राजस्थान में १९७३ का अधिनियम पारित हुआ, तो राज्य के **प्रथम लोकायुक्त के रूप में सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस आई.डी. दुआ (Just. I.D. Dua)** को २८ अगस्त १९७३ को विधिक रूप से नियुक्त किया गया था। इसी समय राज्य के प्रथम 'उप-लोकायुक्त' के रूप में वरिष्ठ पूर्व मुख्य सचिव **श्री के.पी.यू. मेनन** ने शपथ ली थी। वर्तमान में राजस्थान के लोकायुक्त **जस्टिस प्रताप कृष्ण लोहरा** (१३वें लोकायुक्त) कार्यरत हैं।
Q21. राजस्थान लोकायुक्त का 'कार्यकाल' वर्ष २०१८-१९ के हालिया विधिक संशोधनों और अध्यादेशों के निरसन के पश्चात वर्तमान नियमों के अनुसार कितना निर्धारित है?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: राजस्थान में लोकायुक्त का कार्यकाल मूलतः **५ वर्ष** ही था। परंतु मार्च २०१८ में तत्कालीन सरकार ने अध्यादेश जारी करके इसे बढ़ाकर ८ वर्ष कर दिया था। इसके पश्चात, वर्ष २०१९ में नई सरकार ने *राजस्थान लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त (संशोधन) अधिनियम, 2019* पारित करके उस अध्यादेश को निरस्त कर दिया और **कार्यकाल को पुनः घटाकर ५ वर्ष या ७0 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो)** विधिक रूप से कर दिया। अतः विकल्प (B) वर्तमान का सबसे अद्यतन सत्य नियम है।
Q22. राजस्थान लोकायुक्त संस्थान के पास अपनी विधिक जांच (Inquiry) के दौरान निम्नलिखित में से किस कोड के तहत सिविल कोर्ट की पूर्ण विधिक शक्तियां प्राप्त होती हैं?
सही उत्तर: (C)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: अधिनियम की धारा ११ के विधिक प्रावधानों के अनुसार, लोकायुक्त या उप-लोकायुक्त को किसी भी मामले की विधिक जांच या प्रारंभिक पूछताछ करते समय **सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC 1908)** के तहत एक सिविल अदालत की शक्तियां प्राप्त होती हैं। इसके तहत वे: १. किसी भी व्यक्ति को समन (Sutton) जारी कर हाजिर कर सकते हैं, २. किसी भी सरकारी दस्तावेज़ या रिकॉर्ड की कॉपी मँगा सकते हैं, और ३. हलफनामे (Affidavit) पर गवाही दर्ज कर सकते हैं।
Q23. भारत के किस राज्य में ऐतिहासिक रूप से प्रशासनिक भ्रष्टाचार विरोधी ओम्बुड्समैन अर्थात् 'लोकायुक्त संस्थान' का गठन विधिक रूप से सबसे पहले (वर्ष १९७१ में) किया गया था?
सही उत्तर: (A)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: भारत में राज्यों के स्तर पर लोकायुक्त संस्था के गठन का विधिक इतिहास बहुत अनूठा है। ओड़िशा ने सबसे पहले १९७0 में लोकायुक्त अधिनियम पारित किया था, परंतु उसे धरातल पर लागू नहीं किया था। धरातल पर सबसे पहले **वर्ष 1971 में महाराष्ट्र** ने लोकायुक्त संस्थान की विधिवत स्थापना की थी। राजस्थान में यह कानून १९७३ में लागू हुआ था। अतः विकल्प (A) ऐतिहासिक रूप से पूर्णतः सत्य है।
Q24. राजस्थान लोकायुक्त के पास नागरिकों द्वारा दर्ज कराई जाने वाली शिकायतों के विधिक वर्गीकरण के अनुसार, अधिनियम के तहत मुख्य रूप से किन दो विषयों पर जांच करने की शक्ति प्राप्त है?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: लोकायुक्त अधिनियम १९७३ के तहत लोकायुक्त दो मुख्य श्रेणियों में जांच करता है: १. **अभियोग (Allegation):** जहाँ किसी लोक सेवक ने व्यक्तिगत लाभ या भ्रष्टाचार के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया हो, और २. **शिकायत (Grievance):** जहाँ प्रशासन के कुप्रबंधन, अकर्मण्यता या पक्षपात के कारण किसी आम नागरिक को कोई अनावश्यक कष्ट या विधिक हानि उठानी पड़ी हो।
Q25. राजस्थान लोकायुक्त संस्थान अपनी संपूर्ण वार्षिक विधिक और प्रशासनिक गतिविधियों की विस्तृत रिपोर्ट (Annual Report) वैधानिक रूप से किसे सौंपता है?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: अधिनियम की धारा १२ के अनुसार, लोकायुक्त प्रतिवर्ष अपने द्वारा किए गए विधिक कार्यों, प्राप्त शिकायतों और भ्रष्टाचार के विरुद्ध की गई सिफारिशों की **वार्षिक रिपोर्ट राज्य के राज्यपाल को प्रस्तुत करता है**। राज्यपाल महोदय उस रिपोर्ट को राज्य के विधानमंडल (विधानसभा) के पटल पर रखवाने की विधिक व्यवस्था करते हैं, ताकि जनता के प्रतिनिधियों के समक्ष सरकारी शुचिता की समीक्षा हो सके।
Q26. यदि लोकायुक्त की जांच में किसी लोक सेवक (जैसे किसी मंत्री या सचिव) के विरुद्ध भ्रष्टाचार का आरोप पूर्णतः विधिक रूप से सिद्ध हो जाता है, तो लोकायुक्त संस्थान के पास कौन-सा अंतिम विधिक अधिकार प्राप्त होता है?
सही उत्तर: (A)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: यह लोकायुक्त संस्थान की सबसे बड़ी विधिक सीमा (Drawback) मानी जाती है। लोकायुक्त एक **सलाहकारी और सिफारिशी निकाय** है, न कि कोई दंडात्मक न्यायालय। जांच पूरी होने के बाद लोकायुक्त अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री या राज्यपाल को भेजता है। सक्षम प्राधिकारी को ३ महीने के भीतर यह बताना होता है कि उन्होंने लोकायुक्त की विधिक सिफारिश पर क्या प्रशासनिक कार्रवाई की है, परंतु सरकार लोकायुक्त की सलाह मानने के लिए विधिक रूप से पूर्ण बाध्य नहीं है।
Q27. कर्नाटक के 'शक्तिशाली लोकायुक्त मॉडल' की तुलना में राजस्थान के लोकायुक्त मॉडल को विधिक रूप से कमजोर क्यों माना जाता है, इसका मुख्य विधिक कारण क्या है?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: आरएएस मुख्य परीक्षा (Mains 5-Marks) के विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए यह प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण है। कर्नाटक लोकायुक्त को पूरे देश में सबसे शक्तिशाली ओम्बुड्समैन माना जाता था क्योंकि उसके पास पुलिस विंग (ACB) का सीधा नियंत्रण था और वह मंत्रियों के छापों का आदेश स्वतः संज्ञान लेकर दे सकता था। इसके विपरीत, राजस्थान लोकायुक्त के पास **स्वतः संज्ञान (Suo Motu) की शक्तियां अत्यंत सीमित हैं** और उसके पास कोई अपनी स्वतंत्र पुलिस विंग नहीं है, वह जांच हेतु राज्य की एसीबी या पुलिस पर ही विधिक रूप से निर्भर है।
Q28. राजस्थान लोकायुक्त अधिनियम, 1973 की किस धारा के तहत झूठी, मनगढ़ंत या दुर्भावनापूर्ण शिकायत (False/Vexatious Complaints) दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ता के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई व कैद का प्रावधान किया गया है?
सही उत्तर: (A)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: लोकायुक्त संस्था का दुरुपयोग करके किसी ईमानदार लोक सेवक की छवि खराब करने से रोकने के लिए अधिनियम की **धारा १७** में कड़ा सुरक्षा विधिक नियम जोड़ा गया है। इसके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर लोकायुक्त के समक्ष कोई झूठी, मनगढ़ंत या दुर्भावनापूर्ण शिकायत दर्ज कराता है, तो दोष सिद्ध होने पर उसे **३ वर्ष तक के कारावास (Imprisonment)** और भारी आर्थिक जुर्माने से विधिक रूप से दंडित किया जा सकता है।
Q29. राजस्थान के लोकायुक्तों के प्रशासनिक इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित में से किस एकमात्र लोकायुक्त के कार्यकाल के दौरान राज्य सरकार ने 'उप-लोकायुक्त' (Deputy Lokayukta) के पद का सृजन विधिक रूप से किया था?
सही उत्तर: (A)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: राजस्थान लोकायुक्त के इतिहास में **केवल एक ही बार 'उप-लोकायुक्त' (Deputy Lokayukta)** के विधिक पद पर नियुक्ति की गई है। यह गौरवमयी घटना आयोग की स्थापना के समय वर्ष १९७३ में हुई थी, जब प्रथम लोकायुक्त जस्टिस आई.डी. दुआ की सहायता हेतु वरिष्ठ पूर्व मुख्य सचिव **श्री के.पी.यू. मेनन** को उप-लोकायुक्त मनोनीत किया गया था। उनके बाद आज तक राजस्थान में किसी अन्य व्यक्ति को उप-लोकायुक्त पद पर विधिक रूप से नियुक्त नहीं किया गया है।
Q30. यदि राजस्थान लोकायुक्त संस्थान किसी लोक सेवक के विरुद्ध जांच पूरी करने के बाद सक्षम प्राधिकारी को अपनी अंतिम विधिक रिपोर्ट भेजता है, तो अधिनियम की धारा १२(३) के तहत सरकार के लिए उस रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई का ब्यौरा (Action Taken Report) लोकायुक्त को अधिकतम कितने समय सीमा के भीतर देना विधिक रूप से अनिवार्य है?
सही उत्तर: (C)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: लोकायुक्त अधिनियम १९७३ की **धारा १२(३)** के तहत यह वैधानिक नियम है कि जब लोकायुक्त अपनी अंतिम विधिक जांच रिपोर्ट और सिफारिश सक्षम प्राधिकारी (मुख्यमंत्री या राज्यपाल) को सौंपता है, तो सरकार या संबंधित विभाग को उस रिपोर्ट की प्राप्ति की तिथि से **3 महीने (न्यूनतम ९0 दिन) की अनिवार्य अवधि के भीतर** लोकायुक्त को लिखित रूप में यह सूचित करना होता है कि उस सिफारिश पर क्या प्रशासनिक या दंडात्मक विधिक कार्रवाई (Action Taken) की गई है।
अनुभाग ३: केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) एवं नीति आयोग (NITI Aayog) — ३० प्रश्न
Q31. केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की ऐतिहासिक स्थापना वर्ष १९६४ में भारत सरकार के एक कार्यकारी संकल्प द्वारा किस उच्च स्तरीय भ्रष्टाचार विरोधी समिति की विधिक सिफारिशों के आधार पर की गई थी?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: वर्ष १९६२ में लाल बहादुर शास्त्री (तत्कालीन गृह मंत्री) द्वारा **के. संथानम की अध्यक्षता में भ्रष्टाचार निवारण समिति** का गठन किया गया था। इस समिति ने १९६४ में अपनी ऐतिहासिक रिपोर्ट सौंपी, जिसकी मुख्य सिफारिश पर ही ११ फरवरी १९६४ को देश में **केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC)** की स्थापना एक शीर्ष गैर-संवैधानिक कार्यकारी निकाय के रूप में की गई थी। अतः विकल्प (B) पूर्णतः सत्य है।
Q32. किस ऐतिहासिक वाद में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के कड़े विधिक निर्देशों के पश्चात संसद को CVC अधिनियम, २००३ पारित करके इसे पूर्ण 'सांविधिक (Statutory) दर्जा' प्रदान करना पड़ा था?
सही उत्तर: (A)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: आरपीएससी के एडवांस पेपर हेतु यह वाद कंठस्थ होना चाहिए। **विनीत नारायण बनाम भारत संघ (1997)** वाद (जिसे जैन हवाला कांड भी कहा जाता है) में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक निर्णय देते हुए सीवीसी को स्वायत्तता देने और उसे सीबीआई पर विधिक अधीक्षण की शक्ति सौंपने का आदेश सरकार को दिया था। इसी न्यायिक आदेश के अनुपालन में राष्ट्रपति ने पहले अध्यादेश जारी किया और अंततः संसद ने **CVC अधिनियम, 2003** पारित करके इसे एक मजबूत **सांविधिक (Statutory) निकाय** का दर्जा दिया।
Q33. केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के अध्यक्ष (केंद्रीय सतर्कता आयुक्त) एवं अन्य सतर्कता आयुक्तों का विधिक 'कार्यकाल' अधिनियम के तहत कितना निश्चित किया गया है?
सही उत्तर: (C)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: यह पूरे पाठ्यक्रम का एक अनूठा विधिक अपवाद है! सामान्यतः सभी आयोगों का कार्यकाल ५ या ६ वर्ष होता है, परंतु **केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के आयुक्तों का कार्यकाल विधिक रूप से 4 वर्ष या 65 वर्ष की आयु** (जो भी पहले हो) निर्धारित किया गया है। पद से सेवानिवृत्ति के बाद ये भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य नियोजन या नौकरी के पात्र नहीं होते।
Q34. CVC के आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक ३-सदस्यीय उच्च स्तरीय चयन समिति की सिफारिश पर की जाती है। इस समिति की विधिक संरचना में कौन-कौन शामिल होते हैं?
सही उत्तर: (A)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: CVC अधिनियम २००३ की धारा ४ के अनुसार, चयन समिति में ३ सदस्य होते हैं: १. **भारत के प्रधानमंत्री** (समिति के अध्यक्ष), २. **केंद्रीय गृह मंत्री (Home Minister)**, और ३. **लोकसभा में विपक्ष का नेता (Leader of Opposition)**। इस समिति में मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल नहीं होते हैं, इसे विशेष रूप से कंठस्थ रखें।
Q35. केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) मुख्य रूप से किस श्रेणी के सरकारी कर्मचारियों और लोक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामलों की विधिक निगरानी व प्रशासनिक नियंत्रण रखता है?
सही उत्तर: (A)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: CVC का मुख्य विधिक कार्य केंद्र सरकार के प्रशासनिक ढांचे में शुचिता बनाए रखना है। इसके क्षेत्राधिकार के दायरे में **अखिल भारतीय सेवाओं (IAS, IPS, IFoS)** के वे अधिकारी आते हैं जो संघ के मामलों के संबंध में सेवारत हैं, केंद्र सरकार के **Group-A के अधिकारी**, तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) के स्केल-V और उससे ऊपर के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी शामिल हैं। यह सांसदों या मंत्रियों की सीधे जांच नहीं करता (वह कार्य लोकपाल का है)।
Q36. वर्ष २०१५ में केंद्र सरकार के एक नीतिगत और कार्यकारी संकल्प (Cabinet Resolution) द्वारा स्थापित 'नीति आयोग' (NITI Aayog) का पूर्ण विधिक और विस्तारित नाम क्या है?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: नीति आयोग (NITI Aayog) का पूर्ण और आधिकारिक विधिक नाम **National Institution for Transforming India** (राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान) है। इसकी स्थापना १ जनवरी २०१५ को केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक प्रशासनिक संकल्प द्वारा ६५ वर्ष पुराने योजना आयोग (Planning Commission) के स्थान पर की गई थी।
Q37. नीति आयोग (NITI Aayog) के 'वैधानिक और कानूनी स्वरूप' के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा तकनीकी तथ्य पूर्णतः सत्य माना जाता है?
सही उत्तर: (C)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: नीति आयोग का स्वरूप पूरी तरह **गैर-संवैधानिक और कार्यकारी (Extra-constitutional & Executive Body)** है। इसका अर्थ यह है कि संविधान में इसका कोई उल्लेख नहीं है और न ही संसद ने इसके लिए कोई विशेष विधिक कानून पास किया है। इसका गठन केवल और केवल केंद्रीय कैबिनेट के एक साधारण आदेश/प्रस्ताव द्वारा हुआ है, जिसे सरकार जब चाहे नए आदेश से संशोधित या समाप्त कर सकती है।
Q38. नीति आयोग के दार्शनिक दृष्टिकोण और कार्यप्रणाली के संदर्भ में, भूतपूर्व 'योजना आयोग' (Planning Commission) से इसका सबसे बड़ा बुनियादी और विधिक विभेद क्या है?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: आरएएस मुख्य परीक्षा (Mains 10-Marks) के लिए यह सबसे कोर अंतर है। योजना आयोग राज्यों पर नीतियां ऊपर से थोपता था और उसके पास मंत्रालयों व राज्यों को वित्तीय बजट आवंटित करने की विशाल विधिक शक्ति थी। इसके विपरीत, **नीति आयोग के पास धन आवंटित करने का कोई अधिकार नहीं है** (यह शक्ति अब वित्त मंत्रालय के पास है)। नीति आयोग एक **Policy Think Tank** है, जो 'नीचे से ऊपर' (Bottom-Up) के मॉडल पर राज्यों की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए **सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism)** को धरातल पर बढ़ावा देता है।
Q39. नीति आयोग (NITI Aayog) के सांगठनिक ढांचे के अंतर्गत, आयोग की 'शासी परिषद' (Governing Council) की विधिक संरचना में कौन-कौन अनिवार्य रूप से शामिल होते हैं?
सही उत्तर: (A)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: नीति आयोग की **शासी परिषद (Governing Council)** इसका सबसे मुख्य विधिक विंग है जो राष्ट्रीय एजेंडा तय करता है। इसमें **भारत के प्रधानमंत्री** की अध्यक्षता में **सभी राज्यों के मुख्यमंत्री** और **विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों (जैसे दिल्ली, पुडुचेरी, जम्मू-कश्मीर) के मुख्यमंत्री** तथा अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के **उपराज्यपाल (LG)/प्रशासक** शामिल होते हैं। यही वह ढांचा है जो देश में 'टीम इंडिया' की भावना से सहकारी संघवाद को वास्तविक रूप प्रदान करता है।
Q40. नीति आयोग (NITI Aayog) के प्रशासनिक ढांचे में सर्वोच्च कार्यकारी अधिकारी अर्थात् 'मुख्य कार्यकारी अधिकारी' (CEO) की नियुक्ति विधिक रूप से किसके द्वारा की जाती है?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: नीति आयोग के **मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO)** का पद भारत सरकार के सचिव (Secretary to the Government of India) स्तर का होता है। इसकी नियुक्ति सीधे **भारत के प्रधानमंत्री** द्वारा एक निश्चित और तय समय सीमा (Tenure) के लिए की जाती है। आयोग के प्रथम सीईओ *श्रीमती सिंधुश्री खुल्लर* थीं, और वर्तमान में इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद का दायित्व **श्री बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम** संभाल रहे हैं।
Q41. नीति आयोग द्वारा प्रतिवर्ष राज्यों के सतत विकास लक्ष्यों के मूल्यांकन हेतु जारी की जाने वाली अत्यधिक चर्चित रिपोर्ट कौन-सी है, जिसके आधार पर राज्यों को 'अचीवर' या 'एस्पिरेंट' की श्रेणी मिलती है?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: नीति आयोग द्वारा प्रतिवर्ष संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक १७ लक्ष्यों के अनुरूप **एसडीजी इंडिया इंडेक्स (SDG India Index)** जारी किया जाता है। यह सूचकांक देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय मानदंडों पर व्यापक मूल्यांकन करता है और इसके आधार पर राज्यों को स्कोर (0 से १००) देकर रैंकिंग प्रदान की जाती है।
Q42. केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) अधिनियम, २००३ की धारा ८(२) के तहत, सीवीसी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, १९८८ के अंतर्गत आने वाले अपराधों की जांच के संदर्भ में किस विधिक संस्था को निर्देश देने की पूर्ण शक्ति प्राप्त है?
सही उत्तर: (C)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: CVC अधिनियम २००३ के पारित होने के बाद, **केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC)** को **दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (CBI)** के भ्रष्टाचार विरोधी अपराध प्रभाग (Anti-Corruption Division) के कामकाज पर **अधीक्षण (Superintendence) और विधिक निर्देशन की पूर्ण शक्ति** प्राप्त है। सीबीआई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जो भी जांच करती है, उसकी प्रगति रिपोर्ट सीवीसी के समक्ष प्रस्तुत करना विधिक रूप से अनिवार्य होता है।
Q43. नीति आयोग (NITI Aayog) के सांगठनिक ढांचे के अंतर्गत, आयोग के 'उपाध्यक्ष' (Vice-Chairperson) को प्रशासनिक पदानुक्रम के अनुसार देश के भीतर किस विधिक पद का दर्जा (Rank) प्राप्त होता है?
सही उत्तर: (A)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: नीति आयोग के **उपाध्यक्ष (Vice-Chairperson)** की नियुक्ति सीधे प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है। इस पद की महत्ता और प्रशासनिक गरिमा अत्यधिक उच्च रखी गई है। वरीयता क्रम (Table of Precedence) के अनुसार, नीति आयोग के उपाध्यक्ष को **भारत सरकार के केंद्रीय कैबिनेट मंत्री (Cabinet Minister)** का दर्जा और मान-सम्मान प्राप्त होता है, तथा वे कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठकों में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में भाग ले सकते हैं।
Q44. केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के अध्यक्ष एवं सदस्यों को पद से हटाने की विधिक प्रक्रिया के संदर्भ में, भारतीय संविधान या अधिनियम के तहत कौन-सा नियम पूर्णतः सत्य माना जाता है?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: CVC अधिनियम २००३ की धारा ६ के विधिक प्रावधानों के अनुसार, केंद्रीय सतर्कता आयुक्त या किसी सतर्कता आयुक्त को केवल 'साबित कदाचार' या 'असमर्थता' के आधार पर ही हटाया जा सकता है। इसके लिए राष्ट्रपति को मामला **उच्चतम न्यायालय (Supreme Court)** को विधिक संदर्भ के रूप में भेजना होता है। सुप्रीम कोर्ट की विधिक जांच में दोषी पाए जाने की रिपोर्ट मिलने के बाद ही राष्ट्रपति अंतिम आदेश द्वारा उन्हें हटा सकते हैं। यह नियम यूपीएससी (अनुच्छेद ३१७) के हुबहू समरूप है जो इसे मजबूत सुरक्षा प्रदान करता है।
Q45. नीति आयोग (NITI Aayog) के सांगठनिक ढांचे के अंतर्गत 'पदेन सदस्य' (Ex-Officio Members) के रूप में केंद्रीय मंत्री परिषद के अधिकतम कितने मंत्रियों को प्रधानमंत्री द्वारा विधिक रूप से नामित किया जा सकता है?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: नीति आयोग की संरचना नियमावली के अनुसार, केंद्रीय मंत्री परिषद के **अधिकतम 4 मंत्रियों** को प्रधानमंत्री द्वारा **पदेन सदस्य (Ex-Officio Members)** के रूप में नामित किया जा सकता है। व्यावहारिक रूप से सामान्यतः देश के गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री और कृषि/रेल मंत्री को इस कोटे के तहत नीति आयोग का पदेन सदस्य नियुक्त किया जाता है ताकि नीति निर्माण में मंत्रालयों का सीधा और त्वरित समन्वय हो सके।
Q46. नीति आयोग के विधिक ढांचे के अंतर्गत, यदि दो या दो से अधिक पड़ोसी राज्यों के मध्य कोई विशेष क्षेत्रीय विवाद या साझा विकास का एजेंडा उत्पन्न होता है, तो उसके समाधान हेतु 'क्षेत्रीय परिषदों' (Regional Councils) का गठन करने की अनन्य शक्ति किसमें निहित है?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: नीति आयोग के नियमों के अनुसार, विशिष्ट क्षेत्रीय मुद्दों और आकस्मिक विवादों के त्वरित समाधान हेतु **क्षेत्रीय परिषदों (Regional Councils)** का विधिक प्रावधान है। इन परिषदों का गठन सीधे **भारत के प्रधानमंत्री** के निर्देशों पर किया जाता है। इन परिषदों में संबंधित क्षेत्रों के राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होते हैं और इनकी अध्यक्षता स्वयं प्रधानमंत्री या उनके द्वारा नामित नीति आयोग के उपाध्यक्ष करते हैं।
Q47. केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) अधिनियम, २००३ की धारा ५ के विधिक प्रावधानों के अनुसार, सीवीसी के आयुक्तों के वेतन, भत्ते और सेवा शर्तें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के किस पद के विधिक रूप से समतुल्य निर्धारित की गई हैं?
सही उत्तर: (A)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: वैधानिक नियमों के अनुसार, **केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (CVC)** का मासिक वेतन और भत्ते **संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष** के समान (अर्थात ₹२,५0,000/माह प्लस भत्ते) होते हैं तथा अन्य **सतर्कता आयुक्तों (VCs)** के वेतन-भत्ते **UPSC के सदस्य** के समान विधिक रूप से देय होते हैं। इनके सेवाकाल के दौरान इनमें कोई भी अलाभकारी या दंडात्मक संशोधन नहीं किया जा सकता।
Q48. नीति आयोग द्वारा देश के आकांक्षी और पिछड़े जिलों के तीव्र एवं समग्र विकास हेतु वर्ष २०१८ में प्रारंभ किया गया अत्यंत महत्वाकांक्षी राष्ट्रव्यापी विधिक कार्यक्रम कौन-सा है?
सही उत्तर: (C)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: नीति आयोग ने जनवरी २०१८ में देश के ११२ सबसे पिछड़े और अल्प-विकसित जिलों का कायाकल्प करने के उद्देश्य से **'आकांक्षी जिला कार्यक्रम' (Aspirational Districts Programme)** की शुरुआत की थी। यह कार्यक्रम स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, कृषि, जल संसाधन, वित्तीय समावेशन और बुनियादी ढांचे जैसे ४९ मुख्य संकेतकों पर रीयल-टाइम डेटा मॉनिटरिंग के आधार पर जिलों के मध्य 'प्रतिस्पर्धी संघवाद' को बढ़ावा देता है।
Q49. CVC अधिनियम, २००३ की धारा १४ के विधिक प्रावधानों के अनुसार, केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) अपनी संपूर्ण वार्षिक सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी गतिविधियों का प्रतिवेदन (Annual Report) किसे सौंपता है?
सही उत्तर: (C)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: CVC अधिनियम की धारा १४ के अनुसार, केंद्रीय सतर्कता आयोग का यह वैधानिक कर्तव्य है कि वह प्रतिवर्ष अपने द्वारा किए गए विधिक कार्यों और सतर्कता गतिविधियों की **वार्षिक रिपोर्ट भारत के राष्ट्रपति को प्रस्तुत करे**। राष्ट्रपति महोदय इस रिपोर्ट को प्राप्त होने पर, संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के पटल पर अनिवार्य रूप से रखवाते हैं।
Q50. नीति आयोग की संरचना के अंतर्गत, प्रधानमंत्री द्वारा विशेष क्षेत्रों के ज्ञान और दीर्घकालिक विधिक अनुभव रखने वाले प्रख्यात विशेषज्ञों को किस श्रेणी के तहत आयोग में शामिल किया जाता है?
सही उत्तर: (C)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: नीति आयोग की सांगठनिक नियमावली के अनुसार, विज्ञान, तकनीकी, कृषि, अर्थशास्त्र या समाजशास्त्र जैसे विभिन्न क्षेत्रों के अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रख्यात विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और विचारकों को प्रधानमंत्री द्वारा **'विशेष आमंत्रित सदस्य' (Special Invitees)** के रूप में आयोग का हिस्सा बनाया जाता है ताकि देश की नीतियों में आधुनिकतम ज्ञान और विधिक तकनीकी नवाचारों का समावेश हो सके।
Q51. केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के विधिक इतिहास के संदर्भ में, वर्ष १९६४ में देश के 'प्रथम मुख्य सतर्कता आयुक्त' के रूप में किसने पदभार विधिक रूप से ग्रहण किया था?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: जब संथानम समिति की सिफारिश पर १९६४ में सीवीसी का गठन हुआ, तब देश के **प्रथम मुख्य सतर्कता आयुक्त (Chief Vigilance Commissioner)** के रूप में **श्री नित्तूर श्रीनिवास राव (Nittoor Srinivasa Rau)** को नियुक्त किया गया था। श्री एन. विट्टल वर्ष १९९८ के अध्यादेश के समय सीवीसी थे जिन्होंने भ्रष्टाचार विरोधी कड़े पोर्टल लॉन्च किए थे।
Q52. नीति आयोग द्वारा जारी किए जाने वाले 'इंडिया इनोवेशन इंडेक्स' (India Innovation Index) का मुख्य प्रशासनिक उद्देश्य क्या होता है?
सही उत्तर: (A)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: नीति आयोग द्वारा ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष **इंडिया इनोवेशन इंडेक्स** जारी किया जाता है। यह सूचकांक राज्यों के भीतर पेटेंट पंजीकरण, तकनीकी शिक्षा और शोध के माहौल का मूल्यांकन करता है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्यों को एक-दूसरे से बेहतर प्रदर्शन करने हेतु प्रेरित करके देश में **प्रतिस्पर्धी संघवाद (Competitive Federalism)** के विधिक दर्शन को लागू करना है।
Q53. CVC अधिनियम, २००३ की धारा ११ के विधिक प्रावधानों के अनुसार, भ्रष्टाचार के किसी गंभीर मामले की विधिक जांच (Inquiry) करते समय केंद्रीय सतर्कता आयोग को निम्नलिखित में से किस न्यायालय की शक्तियां स्वतः ही प्राप्त हो जाती हैं?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: CVC अधिनियम की धारा ११ स्पष्ट विधिक अधिदेश देती है कि जब आयोग किसी शिकायत की जांच स्वतः या संदर्भ पर कर रहा हो, तो उसे **सिविल प्रक्रिया संहिता १९0८ (CPC)** के तहत पूरे भारत से किसी भी गवाह को समन करने, दस्तावेजों को अनिवार्य रूप से मँगाने और हलफनामे पर साक्ष्य दर्ज करने हेतु एक **सिविल अदालत की पूर्ण वैधानिक शक्तियां** प्राप्त होती हैं।
Q54. नीति आयोग के विधिक इतिहास के संदर्भ में, १ जनवरी २०१५ को आयोग के गठन के समय इसके 'प्रथम उपाध्यक्ष' (First Vice-Chairperson) के रूप में किसे विधिक रूप से नियुक्त किया गया था?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: जब १ जनवरी २०१५ को नीति आयोग अस्तित्व में आया, तब इसके **प्रथम उपाध्यक्ष के रूप में सुप्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. अरविंद पनगढ़िया (Dr. Arvind Panagariya)** को नियुक्त किया गया था, जो वर्तमान में देश के १६वें वित्त आयोग (16th Finance Commission) के अध्यक्ष हैं। मोंटेक सिंह अहलूवालिया योजना आयोग के अंतिम उपाध्यक्ष थे।
Q55. केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की विधिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने हेतु अधिनियम की धारा ५(३) के तहत सेवानिवृत्ति के पश्चात आयुक्तों पर कौन-सा कड़ा विधिक प्रतिबंध लागू किया गया है?
सही उत्तर: (A)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: CVC की पूर्ण स्वायत्तता और निष्पक्षता अक्षुण्ण रखने के लिए अधिनियम की धारा ५(३) में यह बेहद कड़ा विधिक निषेध है कि केंद्रीय सतर्कता आयुक्त या कोई भी सतर्कता आयुक्त, पद पर न रहने के पश्चात, **भारत सरकार या किसी भी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य नियोजन (Employment) या सरकारी पद के पात्र नहीं होंगे**। यह नियम कार्यपालिका के अनुचित प्रभाव को पूर्णतः निष्प्रभावी करता है।
Q56. नीति आयोग द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली 'राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक' (National Multidimensional Poverty Index - MPI) रिपोर्ट का मुख्य विधिक एवं तकनीकी आधार क्या होता है?
सही उत्तर: (A)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: नीति आयोग द्वारा जारी **राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI)** केवल आय पर आधारित न होकर व्यक्ति के जीवन के अभावों का मापन करता है। यह सूचकांक मुख्य रूप से **३ आयामों (स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर)** के अंतर्गत आने वाले **१२ महत्वपूर्ण संकेतकों** (जैसे पोषण, बाल मृत्यु दर, स्कूली शिक्षा के वर्ष, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, बैंक खाते आदि) के आधार पर देश में अत्यधिक वैज्ञानिक और तकनीकी रीति से निर्धनता का सटीक विधिक मूल्यांकन प्रस्तुत करता है।
Q57. CVC अधिनियम, २००३ की धारा ८(१)(G) के विधिक प्रावधानों के अनुसार, केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के भीतर स्थापित 'मुख्य सतर्कता अधिकारियों' (Chief Vigilance Officers - CVOs) के संदर्भ में कौन-सा नियम सत्य है?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: केंद्र सरकार के प्रत्येक मंत्रालय, विभाग और सार्वजनिक उपक्रम के भीतर एक **मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO)** तैनात होता है, जो उस विभाग की भ्रष्टाचार विरोधी आंतरिक सतर्कता विंग का अध्यक्ष होता है। विधिक नियम यह है कि सरकार किसी भी अधिकारी को CVO तब तक नियुक्त नहीं कर सकती जब तक **CVC (केंद्रीय सतर्कता आयोग) उसके नाम को लिखित विधिक मंजूरी (Panel Approval)** न दे दे। ये CVO सीधे अपनी रिपोर्ट सीवीसी को भेजते हैं।
Q58. नीति आयोग (NITI Aayog) के सांगठनिक ढांचे के अंतर्गत, आयोग के 'पूर्णकालिक सदस्यों' (Full-Time Members) की संख्या और उनके प्रशासनिक दर्जे (Rank) के संदर्भ में कौन-सा नियम सत्य है?
सही उत्तर: (B)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: नीति आयोग की संरचना के अनुसार, इसके **पूर्णकालिक सदस्यों (Full-Time Members)** की संख्या कोई निश्चित नहीं है, प्रधानमंत्री अपनी आवश्यकतानुसार प्रख्यात विशेषज्ञों को नियुक्त करते हैं। प्रशासनिक प्रोटोकॉल और वरीयता क्रम (Table of Precedence) के अनुसार, इन पूर्णकालिक सदस्यों को **भारत सरकार के राज्य मंत्री (Minister of State)** का दर्जा और अधिकार विधिक रूप से प्राप्त होते हैं।
Q59. केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) को दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (CBI) के संदर्भ में किस कानून के क्रियान्वयन और जांच के मामलों में 'प्रशासनिक अधीक्षण (Superintendence) की पूर्ण शक्ति' प्राप्त है?
सही उत्तर: (C)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: यह आरपीएससी परीक्षा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधिक बिंदु है। CVC को सीबीआई पर संपूर्ण मामलों में अधीक्षण की शक्ति प्राप्त नहीं है। यदि सीबीआई किसी हत्या या सामान्य चोरी की जांच कर रही है, तो सीवीसी हस्तक्षेप नहीं कर सकता। सीवीसी को सीबीआई पर अधीक्षण की शक्ति केवल और केवल **भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (PC Act 1988)** के तहत दर्ज होने वाले रिश्वतखोरी और पद के दुरुपयोग के मामलों की जांच के संदर्भ में ही विधिक रूप से प्राप्त है।
Q60. नीति आयोग द्वारा देश के सभी राज्यों में स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे के मूल्यांकन हेतु जारी किए जाने वाले 'हेल्थ इंडेक्स' (Healthy States, Progressive India) रिपोर्ट के निर्माण में आयोग किस अंतरराष्ट्रीय विधिक संगठन के साथ तकनीकी सहयोग करता है?
सही उत्तर: (A)गहन विशेषज्ञ व्याख्या: नीति आयोग द्वारा प्रतिवर्ष देश के राज्यों की स्वास्थ्य प्रणालियों के प्रदर्शन को मापने के लिए 'हेल्थ इंडेक्स' (स्वस्थ राज्य, प्रगतिशील भारत) रिपोर्ट जारी की जाती है। इस अत्यंत महत्वपूर्ण सूचकांक के निर्माण में नीति आयोग **विश्व बैंक (World Bank)** के तकनीकी विशेषज्ञों तथा भारत सरकार के **स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय** के साथ त्रिपक्षीय विधिक और तकनीकी समन्वय स्थापित करके डेटा का प्रामाणिक संकलन व प्रकाशन करता है।
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